बुरे वक्त में साथ छोड़ने वाले: फरीदाबाद की राजनीति में हो रही सच साबित

फरीदाबाद की राजनीति में एक पुरानी कहावत सच होती नजर आ रही है—जो कल तक “बीजेपी, बीजेपी” करते थे, आज माहौल देखकर कांग्रेस के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं। ऐसा लगता है, राजनीति में वफादारी का कोई स्थायी नियम नहीं है।

बड़खल विधानसभा क्षेत्र में, जो बिल्डर लॉबी कभी विधायक सीमा त्रिखा के साथ जीने-मरने की कसमें खाती थी, वही लॉबी अब बीजेपी से दिनेश अदलखा को टिकट मिलने के बाद अचानक कांग्रेस नेता विजय प्रताप के जनसंपर्क अभियान में सक्रिय हो गई है। यह परिवर्तन राजनीतिक गणित के बदलाव और हितों के टकराव को उजागर करता है।

हाल ही में, फरीदाबाद NIT में बहादुर सिंह सभरवाल के कार्यालय में जनसंपर्क अभियान के दौरान मंजीत सिंह चावला, वेद भाटिया, अजय नाथ, बृजपाल सिंह, प्रदीप खत्री, जुगेंद्र सिंह सभरवाल, दलजीत सभरवाल और अन्य स्थानीय नेताओं के साथ क्षेत्र की समस्याओं और आवश्यकताओं पर गहन चर्चा की गई। यह साफ दिख रहा है कि बिल्डरों और स्थानीय नेताओं को अब कांग्रेस का समर्थन मिल रहा है, क्योंकि उन्हें समाधान की तलाश है।

फरीदाबाद की राजनीति में यह बदलाव सवाल उठाता है कि क्या यहां हित साधने के लिए पार्टी बदलना ही राजनीति का नया चलन बन गया है?

 

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