रमज़ानपुर मिढौली में सजी रोज़ा इफ़्तार की महफिल, मुल्क व कौम के लिए मांगी दुआएं
बदायूँ: रमज़ान मुबारक के पाक महीने में कादरचौक के रमज़ानपुर मिढौली में एक शानदार रोज़ा इफ़्तार पार्टी का आयोजन किया गया। इस इफ़्तार पार्टी में सैकड़ों की संख्या में रोज़ेदारों ने भाग लिया और एक साथ मिलकर अपना रोज़ा इफ्तार किया। इस आयोजन में मुल्क और कौम की सलामती और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं।
रमज़ान का महीना इस्लामिक कैलेंडर का एक अहम महीना होता है, जिसमें रोजे रखना और इबादत करना अत्यंत पुण्य का कार्य माना जाता है। इसी दौरान हर जगह मस्जिदों और मोहल्लों में इफ़्तार की महफिलें सजाई जाती हैं, जिनमें मुसलमान एक साथ मिलकर अपना रोजा खोलते हैं और इबादत करते हैं। इस इफ़्तार महफिल का उद्देश्य न केवल रमज़ान के पाक महीने में व्रत रखने वालों को इफ़्तार कराना है, बल्कि एकजुट होकर मुल्क और कौम की खुशहाली के लिए दुआ करना भी है।
रोजेदारों की शिरकत और इफ्तार की प्रक्रिया
रमज़ानपुर मिढौली में आयोजित इफ़्तार महफिल में सैकड़ों रोज़ेदारों ने शिरकत की। यह इफ़्तार पार्टी सामूहिक रूप से आयोजित की गई थी, जिसमें सभी रोज़ेदार एकत्रित होकर अपना रोजा खोला। इफ्तार के समय रमज़ान के महीने में खासतौर पर खजूर, पानी, फल, समोसा, चटपटी चीजों का सेवन कर के रोजेदारों ने अपनी भूख और प्यास बुझाई। इस दौरान उपस्थित सभी लोग एक साथ बैठकर इफ़्तार करते हुए इस माह की अहमियत को महसूस कर रहे थे।
महफिल के बाद विशेष दुआ का आयोजन किया गया, जिसमें मुल्क की तरक्की, कौम की खुशहाली, देशवासियों की सलामती और एकता के लिए दुआ की गई। यह दुआआं हर किसी के दिल से निकली हुई थीं, जिसमें प्रार्थना की गई कि अल्लाह इस माह की बर्कत से देश और दुनिया में अमन और शांति बनाए रखें और दुनिया के सभी लोग सुखी और समृद्ध रहें।
रमज़ान का महत्व और इफ़्तार का महत्व
रमज़ान का महीना इस्लाम धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस माह में रोजे रखना, नमाज पढ़ना, दुआ करना और खुद को सच्चाई के मार्ग पर चलने की कोशिश करना एक बड़ा धार्मिक कर्तव्य है। रोजे रखने से केवल शारीरिक भूख और प्यास का सामना नहीं करना होता, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने का भी एक अनमोल अवसर मिलता है। यही कारण है कि रमज़ान के महीने में लोगों का इफ़्तार कराना और दूसरों के साथ मिलकर इफ्तार करना भी एक पुण्य कार्य माना जाता है।
इस माह में सामूहिक इफ्तार महफिलों का आयोजन, समाज में एकता और भाईचारे का प्रतीक बनता है। यह एक सशक्त संदेश देता है कि हम सब एक ही मानवता के भाई हैं, और एक दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांटना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
समाज में भाईचारे और एकता का संदेश
रमज़ानपुर मिढौली में आयोजित इफ़्तार महफिल ने समाज में भाईचारे और एकता का अहम संदेश दिया। यहां पर विभिन्न समुदायों के लोग इकट्ठा हुए और एकजुट होकर रोजा इफ़्तार किया। यह आयोजन केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण था। इसने यह साबित कर दिया कि चाहे कोई भी धर्म हो, सभी के बीच सद्भावना और एकता का होना बेहद जरूरी है।
रमज़ान के महीने में आयोजित होने वाली इस प्रकार की महफिलें लोगों को एकजुट करने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का काम करती हैं। रमज़ान के महीने में भाईचारे और एकता की भावना को बढ़ावा देना इस्लाम धर्म का अहम हिस्सा है।
इफ़्तार महफिल में उपस्थित प्रमुख लोग
रमज़ानपुर मिढौली में आयोजित इस इफ़्तार महफिल में कई सम्मानित और प्रमुख लोग भी उपस्थित थे। इस आयोजन में शकील बख्श, अमान अकील, ग़ुलाम रसूल, उस्मान अली, पीर जी रफ़ीक़ उद्दीन, अब्दुलरहमान, असिफ, शारिक, नईम, शहरोज, कादिर, साहिल, फैजान, शकील समेत कई और लोग मौजूद थे। इन सभी ने इफ़्तार के दौरान अपनी दुआएं मांगी और समाज में अमन, शांति और खुशहाली की कामना की।
इस इफ़्तार महफिल ने न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी एक सकारात्मक प्रभाव डाला। यह आयोजन यह सिद्ध करता है कि इफ़्तार केवल एक धार्मिक कार्य नहीं है, बल्कि यह समाज में एकता, भाईचारे और शांति का संदेश भी देता है।
समाज में शांति और सहयोग का संकल्प
रमज़ानपुर मिढौली में आयोजित इफ़्तार महफिल के आयोजन ने समाज में एकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया। इस अवसर पर सभी उपस्थित लोगों ने मिलकर देश, कौम, और समाज की खुशहाली के लिए दुआएं कीं। इस माह के दौरान आयोजित होने वाली इस प्रकार की महफिलें समाज में जागरूकता और सहिष्णुता को बढ़ावा देती हैं, और यह विश्वास दिलाती हैं कि हम सभी मिलकर एक बेहतर और शांति से भरा हुआ समाज बना सकते हैं।
इस आयोजन के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद, सभी उपस्थित लोग बहुत खुश और संतुष्ट नजर आए, और हर किसी ने अपने-अपने घर लौटते हुए इस रमज़ान माह के दौरान की गई दुआओं को अपनी जिंदगी में अमल में लाने का संकल्प लिया।