नवरात्रि 2025 के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी पूजा: पूजा विधि, महत्व, मंत्र, भोग और पीले रंग का महत्व
नई दिल्ली: नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण होता है। चैत्र नवरात्रि का त्योहार हर साल चैत्र माह के पहले दिन मनाया जाता है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार हिंदू लूणर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। यह नौ दिवसीय पर्व देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा के लिए समर्पित होता है। इस दौरान भक्तगण उपवास रखते हैं, जो इस पवित्र पर्व के महत्वपूर्ण हिस्से में से एक है। इस साल चैत्र नवरात्रि 30 मार्च को घटस्थापना से शुरू होकर 7 अप्रैल को राम नवमी के साथ समाप्त होगी।
नवरात्रि का दूसरे दिन विशेष रूप से देवी दुर्गा के ‘ब्रह्मचारिणी’ स्वरूप की पूजा की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी का नाम ब्रह्म और चारिणी से उत्पन्न हुआ है। ‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली, यानी तप का आचरण करने वाली देवी। उनकी पूजा करने से आत्मविश्वास, आयु, आरोग्य, सौभाग्य और अभय की प्राप्ति होती है। इस दिन की पूजा से व्यक्ति अपने जीवन में कठिनाइयों का सामना साहस और धैर्य के साथ करता है और हमेशा सही मार्ग पर चलता है।
मां ब्रह्मचारिणी का नाम और इतिहास
मां ब्रह्मचारिणी का नाम शास्त्रों में उल्लिखित है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। महर्षि नारद के कहने पर उन्होंने कई वर्षों तक निराहार रहकर तप किया था। इस तपस्या के कारण ही उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या की, और इस तपस्या के प्रतीक के रूप में नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी पूजा की जाती है। उनका यह रूप हमे यह सिखाता है कि जीवन में सफलता पाने के लिए हमें भी कठिन मेहनत और तपस्या करनी चाहिए।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप बहुत ही दिव्य और पवित्र है। वह श्वेत वस्त्रों में लिपटी हुई कन्या के रूप में दिखाई देती हैं। उनके एक हाथ में अष्टदल माला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। यह देवी शास्त्रों के ज्ञान, तंत्र-मंत्र और निगमागम से पूर्ण रूप से परिपूर्ण हैं। मां ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को शास्त्रों का ज्ञान प्रदान करती हैं और उन्हें विजय प्राप्ति की दिशा में मार्गदर्शन करती हैं। उनका स्वरूप बहुत ही सरल, सौम्य और शांतिपूर्ण होता है। उन्हें पूजा में समर्पण भाव से प्रकट किया जाता है, और उनकी आराधना से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की विधि भी अन्य दिनों की पूजा विधि से कुछ हद तक मिलती-जुलती है। इस दिन के लिए खास नियमों का पालन किया जाता है, जो पूजा को फलदायी बनाता है।
प्रारंभिक शुद्धता और स्नान
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शुद्धता के साथ स्नान करें और फिर पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें। इसके बाद, पूरे परिवार के साथ पूजा स्थल पर बैठकर माता की पूजा करें।
पीले रंग का महत्व
इस दिन विशेष रूप से पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए, क्योंकि पीला रंग मां ब्रह्मचारिणी को प्रिय है। साथ ही, पीले रंग के फूल, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें।
पंचामृत से स्नान
मां ब्रह्मचारिणी का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी) से स्नान कराएं। इसके बाद, उनके चेहरे पर रोली, कुमकुम और चावल अर्पित करें।
हवन और अग्यारी
हवन सामग्री जैसे लौंग, बताशे, हवन कुंड में अर्पित करें और अग्यारी करें। इसके बाद, दीपक जलाकर और कपूर से पूजा संपन्न करें।
मंत्रों का जाप और ध्यान
पूजा के दौरान मां ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप करें और मन ही मन उनका ध्यान करें। इस दौरान पूरे परिवार के साथ माता के जयकारे लगाएं।
आरती और पूजा का समापन
पूजा के अंत में, माता ब्रह्मचारिणी की आरती करें और पूजा के दौरान दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। फिर माता के जयकारे लगाते हुए पूजा का समापन करें।
मां ब्रह्मचारिणी का भोग
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को चीनी का भोग अर्पित करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। चीनी का भोग स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्राप्ति के लिए होता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि चीनी के भोग से उपासक को निरोगी जीवन और अच्छे विचार प्राप्त होते हैं। साथ ही, यह भोग मां पार्वती के कठिन तपस्या की याद दिलाता है, जो हमें जीवन में संघर्ष और धैर्य की प्रेरणा देता है।
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के दौरान कुछ विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है। इन मंत्रों के जाप से भक्तों के जीवन में शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन बना रहता है।
दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
(अर्थ: जिनके एक हाथ में अक्षमाला और दूसरे हाथ में कमंडल है, ऐसी उत्तम ब्रह्मचारिणी रूपा मां दुर्गा मुझ पर कृपा करें।)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
इन मंत्रों का जाप माता ब्रह्मचारिणी की कृपा प्राप्त करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
पीले रंग का महत्व
नवरात्रि के दूसरे दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है। पीला रंग ज्ञान, समृद्धि, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसे भारतीय दर्शन में पालन-पोषण करने वाला रंग माना गया है। मां ब्रह्मचारिणी को पीला रंग बहुत प्रिय है, इसलिए इस दिन पूजा में पीले रंग के फूल, फल और वस्त्र अर्पित करना चाहिए। यह रंग मानसिक शांति, बुद्धि और ज्ञान का प्रतीक है और भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
मां ब्रह्मचारिणी की आरती भक्तों के मन को शांति और समृद्धि का अहसास कराती है। इस आरती में देवी के महान गुणों का वर्णन किया जाता है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना की जाती है। इस आरती को श्रद्धा से गाने से जीवन में आशीर्वाद और सफलता मिलती है।
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। उनकी पूजा से आंतरिक शक्ति, आत्मविश्वास, और मानसिक शांति मिलती है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है, जो जीवन में समृद्धि और बुद्धि का प्रतीक है। उनकी पूजा विधि, मंत्र, और आरती भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और संतुलन का संचार करती है।