दिल्ली की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था: CAG रिपोर्ट में स्टाफ, उपकरणों की कमी और वित्तीय कुप्रबंधन का खुलासा
नई दिल्ली: दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था स्टाफ की कमी, अपर्याप्त दवाओं और उपकरणों की समस्याओं से जूझ रही है। शुक्रवार को विधानसभा में प्रस्तुत की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में इन चिंताजनक तथ्यों का खुलासा हुआ। रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी सरकार की ‘मोहल्ला क्लिनिक’ योजना की कमजोर स्थिति भी उजागर की गई।
मोहल्ला क्लीनिक में दवा और उपकरणों की कमी
CAG की समीक्षा के अनुसार, 74 मोहल्ला क्लीनिकों में से किसी के पास भी 165 आवश्यक दवाओं का पूरा स्टॉक नहीं था। इसके अलावा, इन क्लीनिकों में जरूरी उपकरणों जैसे पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर, एक्स-रे व्यूअर, थर्मामीटर और ब्लड प्रेशर मॉनिटर की भारी कमी पाई गई।
कम समय में मरीजों का उपचार
रिपोर्ट में पाया गया कि अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 के बीच 70% मरीजों ने डॉक्टर से एक मिनट से भी कम समय में परामर्श लिया। वहीं, 41 मोहल्ला क्लीनिक 15 दिन से लेकर दो साल तक बंद रहे, क्योंकि डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया या लंबी छुट्टी पर चले गए।
सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2017 तक 1,000 मोहल्ला क्लीनिक खोलने का था, लेकिन 31 मार्च 2023 तक सिर्फ 523 क्लीनिक ही संचालित हो पाए।
अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं पर संकट
CAG रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के अस्पतालों में स्थायी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी आपातकालीन सेवाओं पर भारी पड़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन थिएटर स्टाफ की कमी के कारण बेकार पड़े हैं।
अस्पतालों में सर्जरी के लिए प्रतीक्षा समय 1 से 10 महीने तक का पाया गया।
ICU सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक रही। लोक नायक अस्पताल (LNH) के मेडिसिन विभाग में 12 में से 5 ECG मशीनें मार्च 2020 में खराब पाई गईं।
जुलाई 2020 में एक मशीन गायब हो गई थी, जिसकी शिकायत फरवरी 2021 में दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।
स्टाफ की भारी कमी
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 21% नर्सिंग स्टाफ की कमी पाई गई।
जीबी पंत अस्पताल में 34%
गुरु तेग बहादुर अस्पताल में 28%
लोक नायक अस्पताल में 20%
भगवान महावीर अस्पताल में 33%
इसके अलावा, 19 अलग-अलग पैरामेडिकल कैटेगरी में 30% से अधिक पद खाली हैं, जिनमें ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट और फिजियोथेरेपिस्ट शामिल हैं।
जरूरी दवाओं और उपकरणों की भारी कमी
CAG रिपोर्ट में कहा गया कि सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी आवश्यक दवाओं की 47% आपूर्ति करने में विफल रही। इसके चलते अस्पतालों को निजी विक्रेताओं से दवाएं खरीदनी पड़ीं। गुणवत्ता जांच में देरी के कारण अवमानक दवाओं का भी उपयोग हुआ।
अस्पतालों के विस्तार में देरी
सरकार द्वारा 2016 से 2021 के बीच 10,000 नए बेड जोड़ने का वादा किया गया था, लेकिन सिर्फ 1,357 बेड ही जोड़े जा सके।
15 नई अस्पताल परियोजनाओं के लिए आवंटित भूखंड खाली पड़े हैं।
कई अस्पताल परियोजनाएं छह साल तक की देरी से जूझ रही हैं।
वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप
CAG रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 510.71 करोड़ रुपये का उपयोग नहीं किए जाने का खुलासा हुआ।
दिल्ली का स्वास्थ्य व्यय उसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का मात्र 0.79% है, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत इसे 2.5% तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए निर्धारित 57% धनराशि बिना खर्चे रह गई।
बुनियादी सुविधाओं की भी कमी
CAG ने अस्पतालों में पीने के पानी, स्वच्छ शौचालय और उचित साइनबोर्ड जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी उजागर किया।
लोक नायक अस्पताल के नए OPD ब्लॉक में मरीजों और तीमारदारों के लिए कोई शौचालय नहीं था।
चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में केवल एक ही वाटर कूलर उपलब्ध था, जबकि OPD पहली मंजिल पर भी संचालित थी।
CAG रिपोर्ट ने दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था की जर्जर स्थिति को उजागर किया है। स्टाफ की कमी, उपकरणों की अनुपलब्धता, वित्तीय कुप्रबंधन और अव्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाओं के चलते राजधानी की जनता को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट सरकार को स्वास्थ्य क्षेत्र में तत्काल सुधार लाने की जरूरत की ओर संकेत देती है।