Death Anniversary:चित्रकार से बने फिल्मकार, अपने जीवन में बनाई कुल 29 फिल्में और 10 डाक्यूमेंट्री जिनमें से 32 को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

‘सत्यजित राय के बिना सिनेमा जगत वैसा ही है जैसे सूरज-चाँद के बिना आसमान’- अकीरा कुरोसावा

नई दिल्ली। फिल्मों और लेखन के माध्यम से देश की सच्ची और मार्मिक तस्वीर प्रस्तुत करने वाले सत्यजित एक विश्व विख्यात फिल्म निर्माता थे। आज के ही दिन देश के इस महान निर्देशक और निर्माता ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। आइये जानते है इस महान हस्ती की जीवन की कुछ खास बातें….

जीवन परिचय
सत्यजीत रे का जन्म 2 मई 1921 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था। सत्यजीत के पिता का नाम पिताजी सुकुमार रे और मां का नाम सुप्रभा रे था। वे सिर्फ 3 साल के थे जब उनके पिता का निधन हो गया। उनकी मां रवींद्र संगीत की मंजी हुई गायिका थी। उनके दादाजी ‘उपेन्द्रकिशोर रे’ एक लेखक एवं चित्रकार थे।

शिक्षा
सत्यजीत रे की स्कूली शिक्षा ख़त्म होने के बाद उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज से अर्थशास्त्र की पढाई की और फिर आगे की पढाई के लिए शांति निकेतन गए। शांति निकेतन में रे ने प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस और बिनोद बिहारी मुखर्जी से कला की शिक्षा ली।

करियर
उन्होंने बतौर ग्राफिक डिजाइनर काम करना शुरू किया था। इनके पद का नाम “लघु द्रष्टा” था और महीने के केवल अस्सी रुपये का वेतन था। जिम कॉर्बेट की ‘मैन ईटर्स ऑफ कुमाऊं’ और जवाहरलाल नेहरू की ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ के आवरण भी सत्यजीत रे ने ही डिजाइन किये थे। राय ने दो नए फॉन्ट भी बनाए “राय रोमन” और “राय बिज़ार”। राय रोमन को 1970 में एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पुरस्कार मिला।

फिल्मी सफर
सत्यजीत रे ने कलकत्ता की एक विज्ञापन कंपनी के लिए कुछ दिनों तक काम किया था। वर्ष 1955 में उनकी फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ को 11 इंटरनेशनल अवार्ड प्राप्त हुए थे। इस फिल्म की एक ख़ास विशेषता यह है थी कि इस फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं लिखी गई थी, रे ने इसके लिए कुछ नोट्स लिए थे और ड्रॉइंग्स की थी। इस फिल्म को बनाने के लिए रे ने अपनी बीमा पॉलिसी, ग्रामोफोन रिकॉर्ड और पत्नी विजया के जेवर बेच दिए थे।

निधन
आज ही के दिन 23 अप्रैल 1992 को इस महान निर्देशक सत्यजीत रे का निधन हो गया था।

Leave A Reply

Your email address will not be published.