ऐलनाबाद,सिरसा (एमपी भार्गव: ) दिल्ली सहित कई राज्यों में वूमेन कार्ड के सहारे महिला मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रही भाजपा ने हरियाणा के स्थानीय निकाय चुनाव में वूमेन कार्ड खेला है, जिसकी हरियाणा की महिला मतदाताओं पर क्या प्रभाव पड़ता है,यह तो चुनाव परिणाम घोषित होने उपरांत ही स्पष्ट हो पायेगा? परिषद सिरसा के चुनाव में हलोपा से तालमेल कर भाजपा ने आरक्षित चेयरमैन पद के लिए वीर शांति स्वरूप को अपना उम्मीदवार बनाया है। चेयरमैन सहित अन्य सभी वार्डों में हलोपा भाजपा समर्थक भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल का फूल पर चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस ने पूर्व प्रधान रही सुखविंदर कौर की बेटी जसविंदर कौर, इनैलो ने ओमप्रकाश,आप ने कविता नागर, जजपा ने लक्की चौधरी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जबकि दो निर्दलीय भी अपना चुनावी भाग्य आजमा रहे हैं। परिषद के इस चुनाव में मौजूदा कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया तथा पूर्व विधायक गोपाल कांडा हलोपा सुप्रीमो की प्रतिष्ठा माना जा रहा है। गोपाल कांडा के साथ भाजपा की टीम है, तो गोकुल सेतिया से कांग्रेस दिग्गजों की दूरी बनी हुई नजर आ रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विधायक गोकुल सेतिया से दूरी बनाए रखने वाले कुछ कांग्रेस दिग्गजों का रूझान निर्दलीय प्रत्याशी राजेन्द्र उर्फ राजू एम सी की तरफ देखा जा रहा है। परिषद सिरसा का यह चुनाव इसलिए दिलचस्प दिखाई दे रहा है कि मौजूदा विधायक तथा पूर्व विधायक के विरुद्ध तंज कसे जा रहे हैं। वार्डों में उम्मीदवार मुद्दों को लेकर और उनके समाधान का राग जरूर अलाप रहे हैं। भाजपा ने भगवा ध्वज फहराने के लिए न सिर्फ वूमेन कार्ड खेलने का दाव चला है, वहीं अपने सभी राजनीतिक अस्त्र-शस्त्र चुनाव मैदान में उतार दिए हैं। भाजपा दिग्गजों ने सिरसा में डेरा डाल दिया है तो हलोपा सुप्रीमो गोपाल कांडा अपनी टीम के साथ स्वयं मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं। जजपा, इनैलो,आप और निर्दलीय प्रत्याशी के चुनावी परिणाम राजनीतिक समीकरण प्रभावित कर सकते हैं। मतदाताओं ने अभी चुप्पी बनाई हुई है, इसलिए चुनाव परिणाम क्या करवट लेगा,अभी स्पष्ट नहीं है। भाजपा का जिला सिरसा में कोई विधायक नहीं है और न जिला परिषद में चेयरमैन। राजनीतिक तौर पर भाजपा मुक्त इस जिले में भगवा ध्वज फहराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही, इसलिए चुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। कई वार्डों में चुनावी तस्वीर स्पष्ट दिखाई दे रही है, जबकि चेयरमैन पद के लिए मतदाताओं की क्या सोच हो सकती है,इस प्रश्न का उत्तर तो प्रश्न के गर्भ में है?