विन्ध्याचल। इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हुआ, जिसे समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। भक्तों के लिए यह विशेष नवरात्रि आठ दिनों तक चलेगी, जिसमें मां के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी।
आदिशक्ति जगतम्बा का परम धाम विन्ध्याचल केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि एक प्रमुख सिद्धपीठ भी है। हर वर्ष यहां वासंतिक नवरात्रि के अवसर पर विशाल मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते हैं। इस बार नवरात्र मेला रविवार भोर में मंगला आरती के साथ शुभारंभ हो गया।
नवरात्रि के पहले दिन हिमालय पुत्री मां शैलपुत्री के रूप में आदिशक्ति का पूजन किया जाता है। माता का यह स्वरूप हर प्राणी को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। विन्ध्य पर्वत और पापनाशिनी मां गंगा के संगम तट पर विराजमान मां विंध्यवासिनी, शैलपुत्री के रूप में भक्तों को दर्शन देकर उनकी समस्त पीड़ाओं का निवारण करती हैं।
भक्तों की आस्था है कि इस नवरात्र में मां दुर्गा अभीष्ट सिद्धि और अभीष्ट योग में प्रत्येक भक्त की हर मनोकामना पूर्ण करेंगी।